‘बागबान’ जैसी कहानी हकीकत में बदली: चार बेटों ने बांट लिए मां-बाप, 80 की मां ने 85 साल के पति से मांगा तलाक

Women's Cell Bulandshahar

बुलंदशहर : साल 2003 में रिलीज हुई पारिवारिक फिल्म ‘बागबान’ में बुजुर्ग माता-पिता के साथ बेटों के व्यवहार की कहानी ने लोगों को झकझोर दिया था। फिल्म में जिस दर्द को पर्दे पर दिखाया गया था, वैसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामने आई है। यहां चार बेटों ने अपने बुजुर्ग मां-बाप की जिम्मेदारी उठाने के बजाय उन्हें आपस में बांट लिया। उम्र के उस पड़ाव पर जब पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ की सबसे ज्यादा जरूरत थी, दोनों अलग-अलग बेटों के घर रहने लगे। इसका असर उनके रिश्ते पर ऐसा पड़ा कि 80 वर्षीय वृद्धा अपने 85 वर्षीय पति से कानूनी तौर पर अलग होने की मांग लेकर पुलिस के पास पहुंच गईं।

मामला बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र के एक ग्रामीण इलाके का बताया जा रहा है। बुजुर्ग दंपति ने अपनी जिंदगी का छह दशक से अधिक समय साथ बिताया। चार बेटों की परवरिश से लेकर परिवार को संभालने तक दोनों ने मिलकर जीवन गुजारा। लेकिन बुजुर्गावस्था में जब उन्हें बच्चों के सहारे की जरूरत पड़ी तो बेटों ने माता-पिता की देखभाल को अपनी सुविधा के अनुसार बांट दिया।

दो-दो बेटों के बीच बांट दिए गए मां-बाप

बताया गया कि चारों बेटों ने अपने बुजुर्ग माता-पिता को दो-दो के समूह में अलग-अलग घरों में रखने की व्यवस्था कर ली। पति एक जगह और पत्नी दूसरी जगह रहने लगीं। शुरुआत में शायद यह व्यवस्था परिवार के लिए सुविधाजनक लगी हो, लेकिन बुजुर्ग दंपति के लिए दूरी लगातार परेशानी का कारण बनती गई।

पति-पत्नी, जिन्होंने जिंदगी का लंबा सफर साथ तय किया था, अब एक-दूसरे से दूर रहने को मजबूर थे। उम्र बढ़ने के साथ उन्हें भावनात्मक और शारीरिक सहारे की जरूरत थी, लेकिन अलग-अलग रहने के कारण आपसी बातचीत भी सीमित हो गई।

छोटी-छोटी बातें बनीं बड़े विवाद की वजह

अलग रहने के दौरान दोनों के बीच गलतफहमियां बढ़ने लगीं। फोन पर होने वाली सामान्य बातचीत धीरे-धीरे नोकझोंक और विवाद में बदलने लगी। अकेलेपन और पारिवारिक परिस्थितियों से परेशान 80 वर्षीय महिला आखिरकार पुलिस के पास पहुंच गईं।

उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए पति से अलग होने और तलाक दिलाने की मांग की। करीब 60 साल से अधिक समय तक साथ रहने के बाद बुजुर्ग महिला की यह मांग सुनकर पुलिसकर्मी और काउंसलर भी मामले की गंभीरता को समझने में जुट गए।

महिला सेल में घंटों चली काउंसलिंग

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने इसे महिला परामर्श केंद्र भेजा। यहां दोनों बुजुर्गों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत कराई गई। काउंसलर्स ने कई चरणों में दोनों को समझाने का प्रयास किया और उनके बीच पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की।

काउंसलिंग के दौरान दोनों को साथ रहने के लिए मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद महिला सेल और मध्यस्थों ने ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश की, जिससे बुजुर्ग महिला को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

तलाक नहीं, हर महीने मिलेगा भरण-पोषण

महिला सेल की प्रभारी अलका चौधरी के अनुसार, कानूनी तलाक की स्थिति तक जाने के बजाय दोनों के बीच एक व्यावहारिक समाधान निकाला गया। बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को हर महीने निश्चित भरण-पोषण राशि देने के लिए राजी हो गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि अलग रहने के बावजूद 80 वर्षीय महिला आर्थिक रूप से परेशान न हों और अपनी जरूरतें पूरी कर सकें।

बुलंदशहर की यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बुजुर्ग माता-पिता की बदलती पारिवारिक स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है। जिन चार बेटों को माता-पिता ने जीवनभर पाल-पोसकर बड़ा किया, उन्हीं के बीच उम्र के आखिरी पड़ाव में मां-बाप का बंटवारा हो गया। छह दशक साथ रहने वाले पति-पत्नी के रिश्ते में आई यह दरार बताती है कि बुजुर्गों को सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि साथ, सम्मान और अपनापन भी चाहिए।

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